Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब विधायकों और संभावित प्रत्याशियों के प्रदर्शन को परखने के लिए दूसरे चरण का सर्वे शुरू करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नया सर्वे फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस बार सर्वे का जिम्मा एक अलग एजेंसी को सौंपा गया है, ताकि निष्पक्ष आकलन किया जा सके। पहले चरण की सर्वे रिपोर्ट पहले ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है। अब दोनों एजेंसियों की रिपोर्ट का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।
403 सीटों पर होगा व्यापक सर्वे:-
बीजेपी का यह सर्वे अभियान प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को कवर करेगा। खास बात यह है कि इसमें पार्टी के सहयोगी दलों की सीटें भी शामिल होंगी। राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी की सीटों पर भी सर्वे के जरिए जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दो एजेंसियों से सर्वे कराने का मकसद किसी भी तरह के पक्षपात से बचना और वास्तविक फीडबैक प्राप्त करना है।
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संगठन और जनता से लिया जाएगा फीडबैक:-
सर्वे के दौरान जिलों में संगठन के छोटे पदाधिकारियों से भी राय ली जाएगी। इसके अलावा आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं, आम नागरिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से बातचीत कर फीडबैक जुटाया जाएगा। इस प्रक्रिया में विधायकों और संभावित उम्मीदवारों की छवि, कार्यशैली और जनसंपर्क का भी मूल्यांकन किया जाएगा। सर्वे में युवा, महिलाएं, व्यापारी, डॉक्टर और शिक्षक जैसे वर्गों की राय को विशेष महत्व दिया जाएगा।
पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का अहम फैसला:-
इधर, पंचायत चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने पंचायती राज विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों को अधिकारियों या कर्मचारियों का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग की ओर से सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शासन का कहना है कि वेतन से जुड़ा कोई भी निर्णय नियमों और कानून के दायरे में ही लिया जाएगा। प्रदेश की राजनीति में एक ओर जहां 2027 के चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर सरकार प्रशासनिक स्तर पर भी फैसले लेकर स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रही है।
