UP: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन को लेकर चल रहे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने प्राथमिक शिक्षक समायोजन–3 से जुड़ी प्रक्रिया पर लगी रोक को अब 17 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया है। इसी दिन मामले की अंतिम सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तिथि तक बेसिक शिक्षा विभाग समायोजन–3 से संबंधित कोई भी आगे की कार्रवाई नहीं करेगा। इससे पहले यह रोक 2 फरवरी तक लागू थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।
सभी संबद्ध याचिकाओं पर लागू होगा आदेश
याची शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच.जी.एस. परिहार ने बताया कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम राहत केवल मुख्य याचिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे जुड़ी अन्य सभी याचिकाओं के याचियों को भी इसका लाभ मिलेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों की याचिका और उससे संबद्ध अन्य मामलों पर सुनवाई के बाद पारित किया।
किस शासनादेश को दी गई है चुनौती
याचिकाओं में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 14 नवंबर 2025 को जारी किए गए प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण से जुड़े शासनादेश को चुनौती दी गई है। याचियों ने अदालत से इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
याचियों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने नियम 21 का हवाला देते हुए दलील दी कि किसी भी शिक्षक का समायोजन उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। याचियों ने यह भी कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है, साथ ही कई जगहों पर निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात में असंतुलन पैदा हो रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सरकार की ओर से पेश हुआ पक्ष
मामले में राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फिलहाल याचियों को मिली राहत को 17 फरवरी तक जारी रखने का फैसला किया है। अब सभी की निगाहें 17 फरवरी पर टिकी हैं, जब हाईकोर्ट इस महत्वपूर्ण मामले में अंतिम फैसला सुना सकता है।
