विधान भवन: उत्तर प्रदेश में नए विधान भवन के निर्माण की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया गया है। प्रस्ताव है कि नया भवन लखनऊ के गोमती नगर स्थित उस जमीन पर बनाया जाए, जो पहले सहारा समूह को लीज पर दी गई थी और अब शासन के नियंत्रण में है।

सहारा समूह से वापस ली गई जमीन पर निर्माण प्रस्तावित

जानकारी के अनुसार, गोमती नगर क्षेत्र में करीब 245 एकड़ भूमि पुनः सरकारी स्वामित्व में आई है। यह जमीन मूल रूप से लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और नगर निगम की थी, जिसे पूर्व में लीज पर दिया गया था। लीज की शर्तों के उल्लंघन के बाद इसे निरस्त कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि एलडीए लगभग 75 एकड़ और नगर निगम करीब 170 एकड़ भूमि का कब्जा वापस ले चुका है। पैमाइश रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।

कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया जारी

नए विधान भवन की रूपरेखा और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया चल रही है। चयनित एजेंसी डिजाइन, लागत अनुमान और निर्माण की रूपरेखा तय करेगी। इसके बाद औपचारिक रूप से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

क्यों जरूरी है नया भवन?

वर्तमान विधान भवन लगभग सौ वर्ष पुराना है। बदलते समय के साथ विधायकों की संख्या, तकनीकी आवश्यकताएं और सुरक्षा मानकों में वृद्धि हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस नए परिसर की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

ई-विधानसभा की अवधारणा

प्रस्तावित भवन को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस प्रणाली के अनुरूप विकसित करने की योजना है। इसे ‘ई-विधानसभा’ मॉडल पर तैयार किया जाएगा, जहां कार्यवाही, दस्तावेज और संचार डिजिटल माध्यम से संचालित हो सकें। अधिकारियों के अनुसार, नए भवन के वास्तुशिल्प में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की झलक भी शामिल की जाएगी, ताकि यह आधुनिकता और परंपरा का संतुलित प्रतीक बन सके। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी और विस्तृत परिसर के कारण यह स्थान भविष्य की जरूरतों के अनुकूल है। आने वाले महीनों में परियोजना की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।

admin

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *