लखनऊ: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ईरान पर हुए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा प्रभाव राजधानी लखनऊ के सराफा, मेवा और निर्यात कारोबार पर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।

सराफा बाजार में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ा है, जिससे सोना और चांदी के दामों में तेजी दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार बीते एक सप्ताह में सोने की कीमतों में लगभग 9,000 रुपये से अधिक और चांदी में करीब 20,000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है। बढ़ते दामों के कारण खुदरा बाजार में ग्राहकों की संख्या घटी है। आमतौर पर होली के आसपास बाजार में सुस्ती रहती है, लेकिन इस बार कीमतों में तेजी ने खरीदारी को और प्रभावित कर दिया है।

सूखे मेवों पर भी असर

ईरान से आयात होने वाले पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। थोक व्यापारियों का कहना है कि समुद्री और हवाई मार्गों में रुकावट के कारण माल की आवक सीमित हो गई है, जिससे एक ही दिन में थोक दरों में 40 से 50 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई। हरा पिस्ता और पेशावरी पिस्ता दोनों के दाम बढ़े हैं। अंजीर और केसर भी महंगे हुए हैं। हालांकि बादाम, अखरोट और किशमिश की आपूर्ति मुख्यतः जम्मू-कश्मीर से होने के कारण फिलहाल उनके दाम स्थिर बने हुए हैं।

निर्यात कारोबार पर दबाव

लखनऊ की चिकनकारी और अन्य वस्त्रों का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप के साथ-साथ खाड़ी देशों को निर्यात होता है। मौजूदा हालात में दुबई, ओमान और बहरीन जैसे देशों के लिए भेजी जाने वाली खेप प्रभावित हुई है। कुछ शिपमेंट रास्ते में अटकी हुई हैं, जिससे भुगतान में देरी की आशंका बढ़ गई है।
निर्यातकों का कहना है कि बीमा कवर होने के बावजूद युद्ध जैसे हालात में जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए नए ऑर्डर लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।

खजूर की कीमतों में संभावित उछाल

रमजान के मद्देनजर खजूर की मांग बढ़ने की संभावना है। व्यापारियों के अनुसार फिलहाल बाजार में स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन यदि आपूर्ति बाधित रही तो कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। अनुमान है कि दाम 150-200 रुपये प्रति किलो से बढ़कर दोगुने तक जा सकते हैं। कारोबारी समुदाय का मानना है कि वैश्विक हालात स्थिर होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। प्रशासन और व्यापार संगठन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल खरीदार और व्यापारी दोनों ही सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

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