राम रहीम (चंडीगढ़): करीब दो दशक पुराने चर्चित छत्रपति हत्याकांड में शनिवार को बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। हालांकि, मामले के अन्य तीन दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को अदालत ने बरकरार रखा है। गौरतलब है कि पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 2019 में इस मामले में राम रहीम सहित चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उस फैसले के खिलाफ राम रहीम ने Punjab and Haryana High Court में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

क्या है पूरा मामला

सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर 24 अक्तूबर 2002 को उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली चला दी थी। गंभीर रूप से घायल छत्रपति की 21 नवंबर 2002 को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। बताया जाता है कि अगस्त 2002 में एक गुमनाम पत्र सामने आया था, जिसमें डेरा की साध्वियों के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने इस पत्र को अपने अखबार में प्रकाशित किया था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी सीबीआई जांच

मामले में पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद वर्ष 2003 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस की जांच Central Bureau of Investigation (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर नवंबर 2003 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। करीब 16 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस हत्या को सुनियोजित साजिश मानते हुए राम रहीम सहित चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था।

अन्य मामलों में पहले से सजा काट रहे हैं राम रहीम

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम फिलहाल साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और Sunaria Jail में बंद हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद छत्रपति हत्याकांड में उन्हें बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन अन्य मामलों में उनकी सजा यथावत बनी हुई है।

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