UP News: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों को भेजी जाने वाली हरी सब्जियों का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उड़ानों और समुद्री मार्गों में बाधा आने से करीब 50 प्रतिशत तक कारोबार ठप पड़ गया है। इसके चलते निर्यातकों को अब घरेलू बाजार में ही अपने उत्पाद बेचने पड़ रहे हैं।

खाड़ी देशों में भारत से लौकी, हरी मिर्च, परवल, भिंडी, हरी मटर और टमाटर जैसी कई सब्जियों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है। आमतौर पर ये सब्जियां पहले दुबई भेजी जाती हैं, जहां से उन्हें कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में आगे पहुंचाया जाता है। लेकिन युद्ध के कारण उड़ानों और समुद्री परिवहन में रुकावट आने से यह आपूर्ति लगभग ठप हो गई है।

निर्यात से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि हवाई मार्ग बाधित होने से ताजी सब्जियां समय पर नहीं भेजी जा पा रही हैं। ऐसे में कई व्यापारियों ने अब खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों का रुख किया है। टमाटर केचअप बनाने वाली कंपनियों को टमाटर और फ्रोजन फूड कंपनियों को हरी मटर बेची जा रही है, ताकि नुकसान कम किया जा सके। कारोबारियों के मुताबिक इस स्थिति का सीधा असर कीमतों पर भी पड़ा है। टमाटर के दाम में गिरावट देखी जा रही है और कई जगह कीमतें काफी कम हो गई हैं। निर्यात बंद होने से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सिर्फ सब्जियों का ही नहीं, बल्कि अन्य निर्यात कारोबार भी प्रभावित हुआ है। लखनऊ, बाराबंकी और आसपास के क्षेत्रों से चिकनकारी, जरदोजी और शॉल जैसे हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात करने वाले व्यापारियों का माल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। कई शिपमेंट एयरलाइन कंपनियों के पास अटके हुए हैं और कुछ मामलों में माल को गंतव्य तक पहुंचने में दो सप्ताह तक का समय लग रहा है।

निर्यातकों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो व्यापार पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। समय पर डिलीवरी न होने की स्थिति में कई बार खरीदारों और निर्यातकों को अनुबंध के अनुसार जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। व्यापार जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो हरी सब्जियों और अन्य उत्पादों के निर्यात में और गिरावट आ सकती है। इससे किसानों, व्यापारियों और संबंधित उद्योगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।

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