अयोध्या: Droupadi Murmu ने चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर Ayodhya पहुंचकर भव्य Ram Mandir Ayodhya में रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत स्थापना की, जो इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा, राष्ट्रपति सुबह करीब साढ़े 10 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां उनका स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री ने किया। इसके बाद वह सीधे राम मंदिर पहुंचीं, जहां वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
क्या है ‘श्रीराम यंत्र’ की खासियत?
‘श्रीराम यंत्र’ को केवल एक धातु संरचना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और वैदिक गणनाओं का संगम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यंत्र भगवान श्रीराम के आदर्शों—मर्यादा, धर्म और विजय—का प्रतीक है। जिस प्रकार ‘श्री यंत्र’ को देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है, उसी तरह ‘श्रीराम यंत्र’ भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम की दिव्य शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
विशेष निर्माण और यात्रा
यह अनूठा यंत्र Kanchipuram के एक प्राचीन मठ में तैयार किया गया। निर्माण के बाद इसे Tirupati लाया गया और वहां से रथयात्रा के माध्यम से करीब 10 दिन पहले अयोध्या पहुंचाया गया। करीब 150 किलोग्राम वजनी इस यंत्र पर सोने की परत चढ़ाई गई है, जो इसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाती है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना को राम मंदिर के आध्यात्मिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता का भी प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर अयोध्या आगमन को अपने लिए गौरवपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव बताया। उनके इस दौरे ने नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या के धार्मिक माहौल को और भी विशेष बना दिया।
