
सरकारी व्यवस्था के अनुसार थाना समाधान दिवस में पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से शिकायतें सुनते हैं, ताकि विशेषकर भूमि विवाद जैसे मामलों का तत्काल निस्तारण किया जा सके। हालांकि, शनिवार को तीनों थानों में पुलिस अधिकारी मौजूद रहे, जबकि तहसील प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों के स्थान पर केवल अधीनस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति रही।
फरियादियों का कहना है कि सीमांकन, पैमाइश, कब्जा और भूमि विवाद जैसे मामलों में सक्षम राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी आवश्यक होती है। ऐसे में उनके अनुपस्थित रहने से शिकायतों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया और लोगों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार समाधान दिवस में केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई जाती है, जिससे शिकायतों का निस्तारण लंबित रहता है। उनका कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहें तो वर्षों से लंबित कई विवादों का समाधान मौके पर ही किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य जनता को एक ही स्थान पर त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। उनका मानना है कि इससे आम नागरिकों को बार-बार तहसील और थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि थाना समाधान दिवस में संबंधित अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और बिना उचित कारण अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि तभी थाना समाधान दिवस का उद्देश्य सार्थक होगा और आम जनता को वास्तविक राहत मिल सकेगी।
