लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि पार्टी से जुड़े अधिवक्ता केके पाल की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी है। हालांकि भाजपा सांसद ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से किसी प्रकार की माफी नहीं मांगी है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि कानूनी नोटिस के जवाब में भाजपा सांसद ने बिना शर्त खेद व्यक्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा है तो निशिकांत दुबे को अखिलेश यादव से भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं, निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ किए जा रहे दावे भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है। सांसद ने कहा कि उनके जवाब को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और यह राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है।
भाजपा सांसद की ओर से भेजे गए जवाबी नोटिस में कहा गया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या अधिवक्ता की मानहानि करना नहीं था। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि यदि उनकी किसी टिप्पणी से अनजाने में किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो उसके लिए उन्होंने खेद व्यक्त किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस खेद को किसी प्रकार की गलती, मानहानि या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जवाबी नोटिस में यह भी कहा गया है कि संबंधित टिप्पणी एक पूर्व कानूनी नोटिस के संदर्भ में की गई थी और उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं था। साथ ही नोटिस में लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए सांसद की ओर से अपने सभी कानूनी अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जबकि विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के दायरे में भी पहुंच चुका है।
