मिशनरी भवन पर कब्जा, कोर्ट के निर्देश पर नगराम पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
नगराम, लखनऊ। नगराम थाना क्षेत्र के असलीगढ़ी गांव स्थित एक मिशनरी भवन पर कथित अवैध कब्जा, ताला तोड़कर प्रवेश करने और भवन में रखा सामान गायब होने के मामले में न्यायालय के आदेश पर नगराम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, उन्नाव जनपद के तरगांव निवासी शिवम सिंह, जिन्होंने स्वयं को प्रेसबिटेरियन लखनऊ मिशन फील्ड की संपत्ति का अधिकृत संरक्षक बताया है, ने इस संबंध में एसीजेएम चतुर्थ, लखनऊ की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि असलीगढ़ी स्थित मिशनरी भवन का उपयोग संस्था पिछले कई वर्षों से कर रही थी। भवन के प्रथम तल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। आरोप है कि वर्ष 2025 के दौरान भवन में रहने वाले लोग वहां से चले गए थे और परिसर को बंद कर उसकी देखरेख स्थानीय लोगों को सौंपी गई थी।
वादी के अनुसार, बाद में सूचना मिली कि भवन का ताला तोड़कर कुछ लोगों ने उस पर कब्जा कर लिया है। मौके पर पहुंचने पर भवन से गैस सिलेंडर, गैस चूल्हे, इन्वर्टर, बैटरी, सिलाई मशीनें, वॉशिंग मशीन, फ्रिज, पंखे, निर्माण सामग्री सहित अन्य सामान गायब मिला। शिकायत में इन सामानों की कीमत लाखों रुपये बताई गई है।
मुकदमे में जितेंद्र, सुधाकर सिंह उर्फ सुधर, विशाल, नेहा सिंह, बिन्देश्वरी सिंह, राजेश्वरी सिंह और नंदनी सिंह को नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोगों ने भवन पर अवैध कब्जा कर रखा है। साथ ही विरोध करने पर धमकी देने और झूठे मुकदमे में फंसाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उसने मामले की शिकायत पहले स्थानीय पुलिस, वरिष्ठ अधिकारियों और आईजीआरएस पोर्टल पर की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उसने दावा किया है कि उसके पास भवन से संबंधित दस्तावेज, बिजली बिल, फोटो और वीडियो सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।
नगराम पुलिस का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है और जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन पर आधारित हैं। मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
