मोहनलालगंज, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ की रजिस्ट्री व्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इस निर्णय के तहत अब मोहनलालगंज उप-जिला क्षेत्र की संपत्तियों का पंजीकरण केवल स्थानीय उप-निबंधक कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लखनऊ सदर के विभिन्न उप-निबंधक कार्यालयों में भी कराया जा सकेगा। सरकार के इस फैसले का मोहनलालगंज बार एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है।
स्टाम्प एवं निबंधन अनुभाग-1 की ओर से 4 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार लखनऊ सदर प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ और पंचम उप-निबंधक कार्यालयों का प्रशासनिक एकीकरण करते हुए उन्हें निबंधक कार्यालय, लखनऊ के अधीन कर दिया गया है। साथ ही इन कार्यालयों के उप-निबंधकों को मोहनलालगंज क्षेत्र की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाना है। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों के कार्यभार का संतुलित वितरण और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना भी इस निर्णय का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। नई व्यवस्था के तहत उप-निबंधकों को पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-30 के अंतर्गत निबंधक, लखनऊ को प्राप्त अधिकारों का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
सरकारी फैसले के बाद मोहनलालगंज बार एसोसिएशन ने इसका विरोध दर्ज कराया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि मोहनलालगंज क्षेत्र की रजिस्ट्रियां सदर कार्यालयों में भी होने लगेंगी तो स्थानीय अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों तथा वादकारियों के हित प्रभावित होंगे। उनका यह भी कहना है कि इससे तहसील स्तर पर वर्षों से विकसित प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बार एसोसिएशन के महामंत्री रामलखन यादव ने कहा कि यह निर्णय स्थानीय हितों के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार मोहनलालगंज क्षेत्र की संपत्तियों की रजिस्ट्री स्थानीय उप-निबंधक कार्यालय में ही होना जनहित में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती है तो बार एसोसिएशन आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होगी।
पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ललित मिश्रा ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव से पहले स्थानीय अधिवक्ताओं और संबंधित पक्षों से राय ली जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि यह निर्णय मोहनलालगंज की प्रशासनिक व्यवस्था और पहचान को प्रभावित कर सकता है।
अधिवक्ता ऋषि द्विवेदी ने भी अधिसूचना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नई व्यवस्था से आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने और मोहनलालगंज क्षेत्र की रजिस्ट्रियों का अधिकार स्थानीय उप-निबंधक कार्यालय तक ही सीमित रखने की मांग की।
फिलहाल शासन की अधिसूचना प्रभावी हो चुकी है, लेकिन अधिवक्ताओं के विरोध के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है। बार एसोसिएशन का कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर शासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
