मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील की रजिस्ट्री व्यवस्था में किए गए प्रशासनिक बदलाव को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। गुरुवार को अखिल भारतीय पंचायत परिषद, उत्तर प्रदेश एवं प्रधान संघ लखनऊ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार सिंह ने स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल तथा मोहनलालगंज विधायक अमरेश कुमार रावत के नाम ज्ञापन भेजकर नई व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया है कि हाल ही में जारी शासनादेश के बाद मोहनलालगंज उपनिबंधक कार्यालय के अधिकार क्षेत्र की संपत्तियों का पंजीकरण अब लखनऊ शहर के अन्य उपनिबंधक कार्यालयों में भी किया जा सकेगा। संगठन का कहना है कि इससे भूमि संबंधी विवाद और कथित फर्जीवाड़े की संभावनाएं बढ़ सकती हैं तथा स्थानीय लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि क्षेत्र के किसान, भूमिधर और आम नागरिक वर्षों से स्थानीय स्तर पर रजिस्ट्री की सुविधा का लाभ उठाते रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने से उन्हें अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ सकती है। साथ ही स्थानीय अधिवक्ताओं, स्टाम्प विक्रेताओं और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अन्य लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार का उद्देश्य आम जनता को स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक प्रशासनिक और राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में मोहनलालगंज क्षेत्र की संपत्तियों का पंजीकरण पहले की तरह स्थानीय उपनिबंधक कार्यालय में ही जारी रखा जाना जनहित में अधिक उपयुक्त होगा।
प्रधान संघ ने मांग की है कि 4 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना को वापस लेकर मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र की सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री पूर्व व्यवस्था के अनुसार स्थानीय उपनिबंधक कार्यालय से ही कराई जाए।
यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज के माध्यम से स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री को भेजा गया। इसी विषय पर एक अलग ज्ञापन स्थानीय विधायक अमरेश कुमार रावत को भी सौंपा गया, जिसमें शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर समस्या के समाधान की मांग की गई।
