मोहनलालगंज, लखनऊ। नगराम क्षेत्र में कमालापुर-बिचलिखा माइनर से कुबहरा तक अधूरी पड़ी करीब 390 मीटर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का धरना मंगलवार को 21वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर पहुंचे उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज आकाश सिंह ने किसानों से वार्ता कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसानों ने 9 सितंबर को लोक निर्माण विभाग मुख्यालय के घेराव का ऐलान दोहराया।

वार्ता के दौरान किसानों ने जिला पंचायत की अवर अभियंता मधु की सोमवार को हुई जांच का हवाला देते हुए कहा कि अभिलेखों में उक्त सड़क का वर्ष 2018 में ही डामरीकरण दर्ज है। किसानों का आरोप है कि सड़क के नाम पर करीब 1 करोड़ 85 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, जबकि मौके पर सड़क का निर्माण दिखाई नहीं देता।
मामले की स्थिति जानने के लिए एसडीएम आकाश सिंह किसानों के साथ पैदल मौके पर पहुंचे और पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। मौके पर सड़क निर्माण नहीं मिलने के बाद उन्होंने किसानों को मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। एसडीएम ने कहा कि जिलाधिकारी से वार्ता कर लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, जिला पंचायत और किसानों की संयुक्त बैठक कराई जाएगी, ताकि विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके। इसके लिए उन्होंने दो-तीन दिन का समय मांगा।
हालांकि किसान नेताओं ने प्रशासन को अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि 9 सितंबर की सुबह 10 बजे तक जिलाधिकारी के समक्ष संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक कर किसानों से वार्ता नहीं कराई गई, तो PWD मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि तय समय तक बैठक की सूचना नहीं मिलने पर वे कुबहरा से ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ लखनऊ स्थित लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर कूच करेंगे। किसानों ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
वार्ता विफल होने के बाद किसान नेताओं ने आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए आसपास के गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया। कमालापुर-बिचलिखा, धोवैया, रामबक्स खेड़ा, समेसी, तमोरिया, इस्माइल नगर, नेवाजखेड़ा, देवती और बरकत नगर समेत कई गांवों में ग्रामीणों से संपर्क कर 9 सितंबर के प्रस्तावित घेराव में शामिल होने की अपील की गई।
किसान नेताओं का कहना है कि सड़क का मुद्दा सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों के आवागमन और ग्रामीणों की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ा है। ग्रामीणों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की बात कही।
किसानों ने मांग की कि सरकारी अभिलेखों में सड़क निर्माण और भुगतान दर्ज होने के बावजूद मौके पर सड़क क्यों नहीं है, इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और सड़क का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए।
अब किसानों की नजर 9 सितंबर की सुबह होने वाली प्रशासनिक पहल पर है। बैठक नहीं हुई तो किसान PWD मुख्यालय के घेराव की तैयारी में जुटे हैं।
