निगोहां, लखनऊ। बाबू सुंदर सिंह ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, निगोहां में गेल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय ‘इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण’ संगोष्ठी का बुधवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निस्तारण के महत्व पर विद्यार्थियों को जानकारी दी।

दूसरे दिन आयोजित तृतीय तकनीकी सत्र में इंजीनियर के.एन. शर्मा, भारत प्रमुख, रेबिस ग्राफीन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सिंगापुर ने ई-वेस्ट के वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन और सुरक्षित निस्तारण की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के उचित पुनर्चक्रण को पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया।
चतुर्थ सत्र में डॉ. सौरभ दीक्षित, एज़्योर डेटा इंजीनियरिंग एवं गवर्नेंस लीडर ने तकनीकी विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए केवल संस्थागत प्रयास ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति में पर्यावरण को लेकर जागरूकता भी जरूरी है।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे के साथ न फेंकने और उनका निस्तारण अधिकृत पुनर्चक्रण केंद्रों के माध्यम से कराने की जानकारी दी।
समापन सत्र में विशेष अतिथि डॉ. तरुण शेखर सिंह, शिशु रोग विशेषज्ञ, ब्लैकटाउन अस्पताल, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) बी.सी. यादव, बीबीएयू लखनऊ मौजूद रहे। इस दौरान संस्थान की महासचिव श्रीमती बीना सिंह भी उपस्थित रहीं।
चेयरपर्सन श्रीमती रीना सिंह ने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों से ई-वेस्ट के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। वहीं महानिदेशक डॉ. के.के. सिंह, डायरेक्टर डॉ. आलोक कुमार शुक्ला और डॉ. अरुण कुमार सिंह ने ई-वेस्ट को कम करने, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के पुनः उपयोग और जिम्मेदारी के साथ पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
