लखनऊ। गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी के साथ हुई कथित मारपीट और थप्पड़ की घटना को लेकर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और गठबंधन अपनी जगह हैं, लेकिन वह सबसे पहले अपने समाज के साथ खड़े हैं। घटना को लेकर उनके बयान की अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी पुष्टि हुई है।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को देखने के बाद उन्होंने राम नगीना साहनी से संपर्क करने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि साहनी लंबे समय से समाजवादी पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और उनके साथ सार्वजनिक रूप से इस तरह का व्यवहार किए जाने से वह आहत हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में निषाद समाज के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ अभद्रता की गई। संजय निषाद ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुसार इससे समाज के सम्मान का सवाल भी जुड़ा है। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
सपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग
संजय निषाद ने कहा कि वह समाजवादी पार्टी या भारतीय जनता पार्टी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी दल में मौजूद निषाद नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने सपा नेतृत्व से मामले में कार्रवाई करने की मांग की और दावा किया कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी इस संबंध में बातचीत की।
उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई नहीं की जाती तो वह सपा कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम शुरू करने की चेतावनी दे चुके थे। बाद में उन्होंने दावा किया कि सपा नेतृत्व की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना प्रस्तावित धरना-घेराव रोकने की बात कही। ऐसी कार्रवाई को लेकर रविवार को सपा की ओर से गोरखपुर के कई पदाधिकारियों को हटाए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
राजनीतिक दलों में मौजूद निषाद नेताओं पर भी सवाल
अपने संबोधन में संजय निषाद ने विभिन्न राजनीतिक दलों में मौजूद निषाद नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज के किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होने पर नेताओं को अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने निषाद पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं से भी समाज के मुद्दों पर एकजुट रहने की अपील की। साथ ही कहा कि उनकी पार्टी के साथ खड़े रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वह अपने समाज का हिस्सा मानते हैं।
गोरखपुर की घटना के बाद यह मामला राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है। वहीं, घटना को लेकर पुलिस कार्रवाई और संबंधित पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
