मोहनलालगंज। क्षेत्र के पुरसेनी गांव में सात दशक से अधिक समय से आयोजित हो रही रामलीला आज भी ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है। वर्ष 1952 में शुरू हुई इस परंपरा के तहत इस बार 16 अक्टूबर से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। गुरुवार को भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ आयोजन का समापन होगा। इस अवसर पर बड़ी स्क्रीन पर ‘हनुमान अंश’ फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

पुरसेनी गांव में हर वर्ष दशहरे से चार दिन पहले रामलीला शुरू होती है। दशहरे के एक दिन बाद भगवान श्रीराम के राजतिलक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इसका समापन किया जाता है। वर्षों से ग्रामीण इस परंपरा को श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। रामलीला के माध्यम से लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और सत्य की राह पर चलने का संदेश दिया जाता है।
रामायण के प्रमुख प्रसंगों का हुआ मंचन
रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर उनके राजतिलक तक की कथा के विभिन्न प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इनमें धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, राजा दशरथ की प्रतिज्ञा, राम वनगमन और राजा दशरथ के निधन के प्रसंग शामिल रहे। इसके अलावा सीता हरण, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन की लीलाओं का भी मंचन किया गया। अहिरावण, कुंभकरण और मेघनाथ वध के साथ रावण वध के दृश्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।

मंचन के दौरान राजा दशरथ, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, रावण, मेघनाथ, अहिरावण और कुंभकरण जैसे प्रमुख पात्रों की भूमिकाओं ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत कर धर्म, सत्य और कर्तव्य के महत्व को दर्शाया।
नई पीढ़ी तक पहुंच रही सांस्कृतिक विरासत
पुरसेनी की रामलीला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ गांव की सांस्कृतिक पहचान भी है। इस परंपरा के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
आयोजन के अंतिम दिन गुरुवार को भगवान श्रीराम के राजतिलक का मंचन किया जाएगा। इसके बाद बड़ी स्क्रीन पर ‘हनुमान अंश’ फिल्म दिखाई जाएगी। इसी के साथ इस वर्ष की रामलीला संपन्न हो जाएगी।
