लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आए हिंदू शरणार्थियों को बड़ी राहत दी है। दशकों से अस्थायी रूप से बसे इन परिवारों को अब जमीन पर मालिकाना हक मिलने जा रहा है।
52 सालों बाद मिला न्याय
करीब 1970 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान से पलायन कर यूपी में बसे 63 बंगाली हिंदू परिवारों को कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्र में पुनर्वासित किया गया था। अब योगी सरकार ने इन परिवारों को जमीन का स्वामित्व देने की घोषणा की है, जिससे इनका वर्षों पुराना सपना पूरा होने जा रहा है।
क्या मिलेगा लाभार्थियों को?
सरकार की योजना के तहत इन परिवारों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:
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2 एकड़ कृषि भूमि
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200 वर्ग मीटर का आवासीय प्लॉट
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मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की सहायता राशि
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₹1 प्रति वर्ष की लीज़ पर 30 वर्षों के लिए जमीन का पट्टा, जिसे दो बार और नवीनीकृत किया जा सकता है।
भूमि पर अब होगा कानूनी स्वामित्व
अब तक ये परिवार इन जमीनों पर केवल “अनौपचारिक रूप से” रह रहे थे। लेकिन अब उन्हें पूरी तरह से वैधानिक अधिकार मिलेंगे। इसके लिए सरकार एक नया कानून लाने पर भी विचार कर रही है, क्योंकि पुराना सरकारी अनुदान अधिनियम 1895, अब प्रभावी नहीं है।
इस फैसले से कानपुर देहात के महेन्द्रनगर में रह रहे करीब 400 लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इससे उनकी सामाजिक, आर्थिक और कानूनी स्थिति सुदृढ़ होगी और उन्हें जमीन की खरीद-फरोख्त, ऋण, मकान निर्माण जैसी सभी सुविधाएं वैध रूप से प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, “हम उन सभी लोगों को सम्मान और अधिकार देना चाहते हैं जिन्होंने भारत को अपना घर बनाया है। यह निर्णय मानवता और न्याय दोनों के अनुरूप है।”
