बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में हाल ही में हुई हिंसा का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने 14 नेताओं का एक डेलिगेशन बरेली भेजने का ऐलान किया, लेकिन प्रशासन ने जिले में उनकी एंट्री पर रोक लगा दी है।

जानकारी के मुताबिक, सपा नेताओं का यह डेलिगेशन हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने वाला था। हालांकि, पुलिस-प्रशासन ने साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए किसी भी राजनीतिक दल को मौके पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इसलिए किसी भी राजनीतिक दौरे से माहौल बिगड़ने की आशंका है। इस फैसले के बाद सपा कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखने को मिली है।

वहीं, समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार सच्चाई को सामने आने से रोक रही है। पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रभावित लोगों की आवाज़ उठाने से सरकार डर रही है, इसलिए डेलिगेशन को रोका जा रहा है। गौरतलब है कि बरेली में दो समुदायों के बीच विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया था। इसमें कई लोग घायल हुए थे और हालात काबू में लाने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।

उपद्रवियों की तलाश तेज, धार्मिक जुलूस रद्द
बरेली में बवाल को लेकर पुलिस ने अब तक दस मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें 126 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 3225 अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा खान और उसके कई करीबियों समेत अब तक 89 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फरार चल रहे अन्य उपद्रवियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने 350 से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया है और तलाश तेज कर दी है।

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