Bihar Election: बिहार की सियासत में एक बार फिर लालू परिवार के दो बेटों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अब पूरी तरह से चुनावी राजनीति में अपने बूते उतर आए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल के 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें सबसे ऊपर उनका नाम शामिल है।

तेज प्रताप ने घोषणा की है कि वे इस बार महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि तेज प्रताप यादव ने 2015 में पहली बार इसी सीट से चुनावी शुरुआत की थी और मंत्री पद भी संभाला था। उस समय नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे।

तेजस्वी के नामांकन वाले दिन ही तेज प्रताप का ऐलान

तेज प्रताप यादव ने अपने नामांकन की तारीख भी उसी दिन तय की है, जिस दिन उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव नामांकन करेंगे। तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से 15 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने वाले हैं। इसी बीच युवा आरजेडी के प्रदेश महासचिव ऋषि यादव ने तेजस्वी यादव के समर्थन में पोस्टर जारी कर लोगों को नामांकन के मौके पर आमंत्रित किया है। लेकिन उसी दिन तेज प्रताप का महुआ से नामांकन ऐलान राजनीतिक जंग का संकेत दे रहा है।

महागठबंधन में बढ़ी टेंशन

महागठबंधन में पहले से ही सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान चल रही है। कांग्रेस ने अब तक तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा घोषित नहीं किया है। ऊपर से IRCTC केस में तेजस्वी, लालू और राबड़ी देवी पर आरोप तय होने से सियासी समीकरण और उलझ गए हैं। इन सबके बीच तेज प्रताप यादव का अलग रास्ता चुनना, महागठबंधन के लिए नए संकट की आहट बन गया है।

तेज प्रताप का सीधा संदेश — “अब मैं भी मैदान में हूँ”

आरजेडी से अलग होने और पारिवारिक विवादों के बाद कुछ समय तक शांत रहे तेज प्रताप यादव अब खुलकर तेजस्वी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि अगर तेजस्वी दो सीटों से लड़ते हैं, तो वे भी राघोपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान के बाद अब महुआ से उनकी औपचारिक घोषणा को तेजस्वी यादव के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है।

महुआ सीट पर होगा दिलचस्प मुकाबला

महुआ सीट फिलहाल आरजेडी विधायक मुकेश रौशन के पास है। ऐसे में जब तेज प्रताप यादव ने इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, तो आरजेडी को अब यह तय करना होगा कि वह महुआ में किसे उतारे। बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि महुआ का यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि लालू परिवार के भीतर राजनीतिक शक्ति संतुलन का इम्तिहान भी साबित हो सकता है।

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