Bihar Politics: हार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी में उबल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। लालू प्रसाद यादव की सबसे चर्चित बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया। उन्होंने न सिर्फ राजनीति छोड़ने का एलान किया, बल्कि अपने ही परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा कर दी।
“मैं राजनीति छोड़ रही हूं, परिवार से नाता तोड़ रही हूं” — रोहिणी आचार्य
रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय और रमीज ने मुझसे यही कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।” इस पोस्ट में राज्यसभा सांसद संजय यादव और रमीज का नाम आने से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी यादव के बेहद करीबी और सलाहकार माने जाते हैं। पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती दखलंदाज़ी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पहले भी जताई थी नाराज़गी, सोशल मीडिया पर किया था ‘अनफॉलो’
यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी ने परिवार और पार्टी के ढांचे को लेकर नाराज़गी जताई हो। कुछ महीने पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पिता लालू यादव, भाई तेजस्वी यादव और कई परिजनों को अनफॉलो कर दिया था। उस समय भी खबरें आई थीं कि वह संजय यादव के बढ़ते प्रभाव से बेहद खिन्न थीं। चुनावों में सक्रिय भूमिका चाहती थीं, लेकिन कथित तौर पर उन्हें दरकिनार कर दिया गया। अब चुनावी हार के बाद उनकी नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है।
RJD की हार ने बढ़ाया तनाव
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में इस बार आरजेडी को करारी हार मिली है और महागठबंधन को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले।
पार्टी के भीतर इसके लिए:
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रणनीति की ग़लतियाँ
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संगठन में गुटबाज़ी
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संजय यादव की दखल
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उम्मीदवार चयन में विवाद
जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।
रोहिणी द्वारा किया गया यह बड़ा कदम पार्टी नेतृत्व और परिवार की अंदरूनी राजनीति पर गंभीर सवाल उठाता है।
रोहिणी — त्याग की मिसाल, अब गहरी निराशा
2022 में रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू यादव को किडनी दान कर पूरे देश में मिसाल पेश की थी। उन्हें “त्याग की प्रतिमूर्ति” कहा गया था। लेकिन अब उन्हीं रोहिणी का परिवार से नाता तोड़ने का फैसला बताता है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है।
परिवार की फूट से RJD की छवि को बड़ा नुकसान
रोहिणी के इस कदम से आरजेडी की पारिवारिक एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं. विपक्ष को जंगलराज और परिवारवाद के आरोप लगाने का मौका मिल गया. तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद RJD के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है।
