नई दिल्ली। बिहार की राजनीति के दिग्गज और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए शुक्रवार का दिन बड़ा कानूनी झटका लेकर आया। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ (जमीन के बदले नौकरी) घोटाले में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में आपराधिक साजिश के प्रथम दृष्टया सबूत पाए हैं। इस फैसले के साथ ही वर्षों से जांच के घेरे में रहा यह मामला अब निर्णायक कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर लालू परिवार के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ सकता है।
अदालत ने मानी सुनियोजित साजिश
सुनवाई के दौरान विशेष कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के बदले जमीन हासिल करने के लिए एक सुनियोजित और व्यापक साजिश रची गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “सरकारी पद की मर्यादा को ताक पर रखकर एक आपराधिक उद्यम (Criminal Enterprise) की तरह काम किया गया, जहां सरकारी तंत्र का इस्तेमाल निजी लाभ और संपत्ति अर्जन के लिए किया गया।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लालू यादव और अन्य आरोपियों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिकाएं आधारहीन हैं, क्योंकि चार्जशीट में उनके खिलाफ पर्याप्त संकेत और सामग्री मौजूद है।
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं में चलेगा मुकदमा
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आदेश दिया है कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। इनमें शामिल हैं—
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धारा 13(1)(डी) – पद के दुरुपयोग से अनुचित लाभ लेना
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धारा 13(2) – आपराधिक कदाचार के लिए दंड
चार्जशीट के अनुसार, लालू यादव के करीबी सहयोगियों और परिवार के सदस्यों ने सह-साजिशकर्ता के रूप में नौकरियों के बदले जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने माना कि इस पूरे मामले में संवैधानिक विवेक और अधिकारों का खुलेआम दुरुपयोग किया गया, जिससे सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
52 आरोपियों को मिली बड़ी राहत
हालांकि, इस फैसले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। अदालत ने जहां लालू यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, वहीं 52 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट का कहना था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पुख्ता साक्ष्य नहीं हैं।
आगे की राह और सियासी असर
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि
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लालू यादव की कानूनी टीम इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में क्या कदम उठाती है,
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और इस कानूनी फैसले का बिहार की राजनीति पर कितना और कैसा असर पड़ता है।
फिलहाल इतना साफ है कि ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला अब सिर्फ जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि लालू परिवार के लिए एक गंभीर कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।
