वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त आव्रजन रुख को दोहराते हुए बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो रूस, ईरान समेत करीब 75 देशों के नागरिकों को अमेरिका का वीजा नहीं दिया जाएगा। उनके इस बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक कूटनीति में हलचल मच गई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सख्ती
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने दावा किया कि जिन देशों से अमेरिका को आतंकवाद, अवैध आव्रजन और सुरक्षा से जुड़े खतरे महसूस होते हैं, वहां से आने वाले लोगों पर कड़ी पाबंदी जरूरी है। उन्होंने कहा “अमेरिका अब जोखिम नहीं उठाएगा। हमें अपने देश को पहले रखना होगा।”
किन देशों पर पड़ सकता है असर
हालांकि ट्रंप ने सभी 75 देशों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन संकेत दिए हैं कि इसमें—
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रूस
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ईरान
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मध्य पूर्व के कई देश
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अफ्रीका और एशिया के कुछ राष्ट्र
शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
छात्रों और कारोबार पर पड़ेगा प्रभाव
इस प्रस्तावित फैसले का सबसे ज्यादा असर—
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अमेरिका में पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों,
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व्यवसायियों,
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टूरिज्म और मेडिकल वीजा आवेदकों
पर पड़ सकता है। खासकर विकासशील देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका जाना और मुश्किल हो सकता है।
विरोध में उतरे मानवाधिकार संगठन
ट्रंप के बयान के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी और मानवाधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इस तरह की नीतियां नस्लीय और धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं और अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
पहले भी लगा चुके हैं ट्रैवल बैन
गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल में भी डोनाल्ड ट्रंप ने कई मुस्लिम बहुल देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था, जिसे लेकर अमेरिका समेत दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब एक बार फिर उनका यह बयान चुनावी रणनीति और अमेरिका फर्स्ट एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है।
