नई दिल्ली। संसद के निचले सदन लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। मतदान के बाद यह विधेयक पारित नहीं हो पाया।
सदन में हुए मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में जबकि 230 ने इसके विरोध में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट नहीं मिल पाए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि विधेयक पारित नहीं हो सका।
यह विधेयक केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व वाली सरकार के लिए अहम माना जा रहा था। चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए विधेयक के समर्थन की अपील की थी। वहीं, विपक्षी दलों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
करीब 21 घंटे चली बहस में 100 से अधिक सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें बड़ी संख्या में महिला सांसद भी शामिल रहीं। विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था, साथ ही परिसीमन के आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रावधान शामिल था।
विधेयक गिरने के बाद राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से इसे महिलाओं को अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था।
इस परिणाम के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल इस विधेयक पर आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है और भविष्य में इसे नए सिरे से पेश किया जा सकता है।
