निगोहां, लखनऊ। क्षेत्र में संचालित कई कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। अधिकांश कोचिंग सेंटर बहुमंजिला भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई संस्थानों में छात्रों के आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी मार्ग है। किसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए अलग से इमरजेंसी एग्जिट या वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं दिखाई देती, जिससे दुर्घटना की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार क्षेत्र के अनेक कोचिंग संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं होने की चर्चा है। इसके बावजूद ये संस्थान नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित विभागों से जांच और सत्यापन की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर सीमित जगह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बैठाया जाता है। भीषण गर्मी के मौसम में पर्याप्त वेंटिलेशन और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी भी महसूस की जा रही है। वहीं आग लगने जैसी आकस्मिक घटनाओं से निपटने के लिए अग्निशमन उपकरणों और आपदा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं की उपलब्धता पर भी प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हैं।
हाल के दिनों में प्रदेश में कोचिंग संस्थानों से जुड़ी घटनाओं के बाद अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था तथा आपातकालीन निकासी जैसे मानकों की नियमित जांच आवश्यक है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग से संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाकर क्षेत्र के सभी कोचिंग संस्थानों की जांच कराने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
