मोहनलालगंज, लखनऊ। निबंधन कार्यालयों के क्षेत्राधिकार में बदलाव को लेकर शासन की ओर से जारी आदेश के विरोध में मंगलवार को मोहनलालगंज तहसील सभागार में अधिवक्ताओं की संयुक्त आम सभा हुई। इसमें मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बीकेटी और मलिहाबाद तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया।
सभा में अधिवक्ताओं ने 4 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश पर आपत्ति जताते हुए इसे अधिवक्ताओं और आम जनता के हितों के विपरीत बताया। उन्होंने शासन से आदेश पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

संयुक्त सभा की अध्यक्षता मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कौशलेन्द्र शुक्ला ने की, जबकि महामंत्री राम लखन यादव ने संचालन किया। चारों बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने निबंधन व्यवस्था में किए गए बदलाव को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
अधिवक्ताओं का कहना था कि क्षेत्राधिकार में बदलाव का असर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों, वादकारियों और अन्य नागरिकों पर पड़ेगा। उनके मुताबिक रजिस्ट्री से संबंधित कार्यों के लिए लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, जिससे समय और आर्थिक खर्च बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का निर्णय लेने से पहले स्थानीय बार एसोसिएशनों और संबंधित लोगों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि नए आदेश से स्थानीय स्तर पर निबंधन कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं और अन्य लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने शासन से जनहित और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आदेश को वापस लेने की मांग की।
आदेश वापस होने तक जारी रहेगा विरोध
विस्तृत चर्चा के बाद चारों तहसील बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक शासनादेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार के माध्यम से विरोध जारी रखा जाएगा।
अधिवक्ताओं ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को मंडल स्तर तक ले जाया जाएगा। इसके लिए मंडल की अन्य तहसीलों और जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं के साथ संयुक्त बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल अधिवक्ताओं के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, वादकारियों और आम नागरिकों की सुविधा से भी जुड़ा है। संयुक्त सभा में प्रस्ताव पारित कर शासन से 4 अगस्त 2026 के आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई।
