लखनऊ, 26 अगस्त 2026। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश समेत देश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षा योजनाओं की धनराशि के अपेक्षाकृत कम उपयोग और पीएम-पोषण योजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।
संजय सिंह ने मांग की है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति, केंद्र एवं राज्य सरकार की शिक्षा योजनाओं में धन के इस्तेमाल और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
शिक्षा बजट के इस्तेमाल पर उठाया सवाल
संजय सिंह के अनुसार, शिकायत में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में बताया गया है कि विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की पांच केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए ₹62,660 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले 13 फरवरी 2026 तक करीब ₹32,296.54 करोड़ ही खर्च हुए थे।
इसी तरह समग्र शिक्षा योजना के लिए निर्धारित ₹41,250 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले उपयोग करीब 54.9 प्रतिशत बताया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण और बुनियादी सुविधाओं के लिए बड़ी धनराशि उपलब्ध कराई गई, तो उसका पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं हो पाया।
यूपी में हजारों करोड़ रुपये खर्च नहीं होने का दावा
संजय सिंह ने कहा कि 2019-20 से 2021-22 के बीच उत्तर प्रदेश में करीब ₹9,103 करोड़ की राशि खर्च नहीं किए जाने का दावा शिकायत में किया गया है। उनके मुताबिक, दूसरी तरफ प्रदेश के अनेक सरकारी विद्यालयों में अभी भी बिजली, पानी, शौचालय और डिजिटल सुविधाओं जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी है।
उन्होंने इन दोनों परिस्थितियों के बीच संबंध की जांच कराने की जरूरत बताई।
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर आंकड़ों के जरिए सवाल
शिकायत में UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में कई तरह की कमियों का उल्लेख किया गया है।
इन आंकड़ों के मुताबिक:
770 विद्यालयों में पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं है।
8,738 विद्यालयों में हाथ धोने की सुविधा नहीं है।
6,460 विद्यालयों में बालिका शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
5,054 विद्यालयों में बालक शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
26,151 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन नहीं है।
3,600 विद्यालयों में बिजली व्यवस्था कार्यशील नहीं बताई गई है।
63,590 विद्यालयों में खेल मैदान नहीं है।
1,31,609 विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा नहीं है।
2,59,414 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है।
1,01,407 विद्यालयों में शिक्षण के लिए कार्यशील कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं।
76,743 विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए रैंप नहीं है।
संजय सिंह ने कहा कि ये आंकड़े सरकारी स्कूलों के कायाकल्प से जुड़े दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की ओर इशारा करते हैं।
पीएम-पोषण योजना के खर्च पर भी सवाल
राज्यसभा सांसद ने पीएम-पोषण योजना के बजट और खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, वर्ष 2025-26 में ₹12,500 करोड़ के आवंटन के मुकाबले 13 फरवरी 2026 तक करीब ₹6,639.22 करोड़ खर्च हुए थे। बाद में संशोधित अनुमान को घटाकर ₹10,600 करोड़ किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
उन्होंने योजना के लाभार्थी बच्चों की संख्या में कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मिड-डे मील केवल भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के पोषण तथा विद्यालय में उनकी उपस्थिति से भी जुड़ी है।
मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच की मांग
संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और सीतापुर में मिड-डे मील से संबंधित सामने आए मामलों का हवाला देते हुए भोजन की गुणवत्ता और वास्तविक लाभार्थियों की नियमित जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि पीएम-पोषण के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले खाद्यान्न, भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति और खर्च की राशि का आपस में मिलान कराया जाना चाहिए।
अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
याचिका समिति के सामने रखी गई मांगों में हरदोई के जिलाधिकारी, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग भी शामिल है।
संजय सिंह ने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं में कथित गड़बड़ियों या कमियों को सामने लाने वाले नागरिकों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ यदि प्रशासनिक या पुलिस कार्रवाई की गई है, तो उसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
स्वतंत्र ऑडिट समेत कई मांगें
संजय सिंह ने याचिका समिति से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे का राज्यवार आकलन कराने, समग्र शिक्षा और पीएम-पोषण की धनराशि के आवंटन एवं उपयोग की विस्तृत रिपोर्ट मंगाने तथा पीएम-पोषण योजना का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और बच्चों के पोषण पर खर्च होने वाला सरकारी धन जनता का पैसा है। सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाओं और आंकड़ों की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसका लाभ बच्चों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूलों और बच्चों से जुड़े मुद्दों को संसद में लगातार उठाती रहेगी।
