नगराम, लखनऊ। ऑनलाइन शॉपिंग में सामान की डिलीवरी नहीं होने पर कस्टमर केयर से संपर्क करने की कोशिश एक युवक को महंगी पड़ गई। साइबर ठगों ने कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर उसे एक संदिग्ध लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही युवक का मोबाइल साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गया और उसके बैंक खाते से 16,999 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर नगराम पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने कार्रवाई करते हुए 6,999 रुपये वापस कराने में सफलता हासिल की है।

नगराम थाना क्षेत्र के करोरवा गांव निवासी ऋषभ कुमार ने 20 सितंबर को साइबर हेल्प डेस्क में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए मंगाया गया सामान तय समय पर नहीं पहुंचा था। ऑर्डर की जानकारी लेने और समस्या का समाधान कराने के लिए वह कस्टमर केयर से संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को कस्टमर केयर से जुड़ा कर्मचारी बताते हुए उनसे संपर्क किया।

आरोप है कि उस व्यक्ति ने समस्या दूर करने का भरोसा दिलाकर ऋषभ को एक लिंक भेजा। कस्टमर केयर का लिंक समझकर युवक ने उसे खोल लिया। इसके कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते से 16,999 रुपये निकल गए। खाते से रकम कटने का संदेश मिलने पर उन्हें साइबर ठगी का पता चला, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

मामले को गंभीरता से लेते हुए नगराम साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी उपनिरीक्षक अल्पा कटियार ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पीड़ित की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराई गई। इसके बाद संबंधित बैंक और पोर्टल के माध्यम से ठगी की रकम को होल्ड कराने की प्रक्रिया अपनाई गई। पुलिस और बैंक के आपसी समन्वय से 6,999 रुपये पीड़ित को वापस दिलाए गए।

इस कार्रवाई में साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी उपनिरीक्षक अल्पा कटियार के साथ महिला कांस्टेबल रश्मि देवी की भी अहम भूमिका रही। हालांकि, पीड़ित को पूरी रकम वापस नहीं मिल सकी है, लेकिन पुलिस की तत्परता से उसे आंशिक राहत जरूर मिली है।

फर्जी कस्टमर केयर से रहें सावधान

पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन खरीदारी के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए इंटरनेट पर मिले अनजान कस्टमर केयर नंबरों पर भरोसा न करें। अज्ञात व्यक्तियों की ओर से भेजे गए लिंक को खोलने से बचें और किसी के साथ ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जानकारी दें। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ठगी की रकम को रोकने और वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।

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