Category: धर्म कर्म

इन आँखों-कानों से उस प्रभु को देख-सुन नहीं सकते: बाबा उमाकांत जी

धर्म-कर्म : जीते जी प्रभु से मिलने का तरीका नामदान बताने वाले, जान-अनजान में बने पाप कर्मों की मिल रही सजा से बचने का उपाय बताने वाले, जिनके रूप में…

शराब-मांस, जीव हत्या की कमाई फलती फूलती नहीं उलटे नाश करती है: बाबा उमाकांत जी

धर्म-कर्म : शराब के नुक्सान बता समझा कर, इसे छुडवा कर इंसान की जान बचाने, समाज का सम्मान बढाने और देश का उत्थान करने वाले, भारत में गौ हत्या बंद…

भारत देश में कुछ दिनों के बाद गौ हत्या बंद हो जाएगी: बाबा उमाकांत जी

धर्म-कर्म : शराब के नुक्सान बता समझा कर, इसे छुडवा कर इंसान की जान बचाने, समाज का सम्मान बढाने और देश का उत्थान करने वाले, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, उज्जैन…

उस प्रभु दाता से मांगते रहना चाहिए, कभी तो देगा, सुमिरन ध्यान भजन का दर नहीं छोड़ना चाहिए

धर्म-कर्म: गुरु से कैसा प्रेम किया जाए कि वो खुश हो जाए, ये बताने समझाने वाले, जिनसे देने वाले भी पूछ कर ही देते हैं, लोगों का मन बदल कर…

सन्तमत की प्रार्थनाओं का लोगों पर असर पड़ता है: उमाकांत जी महाराज

धर्म कर्म: गुरु से कैसा प्रेम किया जाए कि वो खुश हो जाए, ये बताने समझाने वाले, जिनसे देने वाले भी पूछ कर ही देते हैं, ऐसे सब कुछ सब…

बावल में बन रहे बाबा जयगुरुदेव मंदिर से बहुत से जीवों के दु:ख कष्ट होंगे दूर

धर्म-कर्म : बार-बार इशारे में समय के अति महत्वपूर्ण सेवा के मौके का महत्त्व समझाने वाले, अपने गुरु के पक्के भक्त, गुरु के ऋण को चुकाने का तरीका बताने वाले,…

समय की जिसने कीमत लगाई वही पार हो गया: बाबा उमाकांत जी महाराज

धर्म-कर्म : जिस एक चीज को प्राप्त करने से इस दुनिया की सभी चीजें प्राप्त हो जाती हैं उस नामदान की अमोलक दौलत लुटाने वाले, दुनिया बनाने वाले को प्राप्त…

सबके सिरजनहार सतपुरुष समय-समय पर धरती पर सतगुरु के रूप में आते रहते हैं

धर्म-कर्म : निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव जी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, जीवों को अपने निज घर सतलोक जयगुरुदेव धाम चलने का रास्ता नामदान देने वाले, अपने अपनाए हुए जीवों को ताकत शक्ति…

बाबा उमाकांत जी ने बताया कलयुग और सतयुग के बीच समावेश के समय बचत का उपाय

धर्म-कर्म : लक्ष्मी को घर में रोकने के उपाय बताने वाले, कुदरत की बढ़ती नाराजगी और त्रिकालदर्शी होने के नाते कुदरत द्वारा अभी और आगे भी, दी जाने वाली सजा…

जिभ्या और निभ्या के स्वाद से बचोगे तो लुटने से बचोगे नहीं तो तनिक सी असावधानी, चंचलता और सब कमाई ख़त्म

धर्म-कर्म : सब जीवों के सच्चे हितैषी, रूहानी दौलत लुटने से बचाने के लिए समय रहते सबको सावधान करने वाले, इस समय के महापुरुष, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, परम दयालु,…