Category: धर्म कर्म

अगर लोग शाकाहारी-नशामुक्त नहीं बने तो, सतयुग नहीं देख पाएंगे: बाबा उमाकांत जी

धर्म-कर्म: शरीर से जान-अनजान में बन चुके गलत कर्मों की सजा से बचने का तरीका बताने वाले, युगपुरुष, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकांत जी महाराज ने…

कब शुरु हो रहा पितृ पक्ष, जानिए श्राद्ध पक्ष की तिथि और पिंडदान की विधि

Pitra paksh 2023: पितरों को समर्पित पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है. इस समय अपने पितरों की तृप्ति और शांति के लिए श्राद्ध, तर्णन और पिंडदान…

Anant Chaturdashi 2023: जानें कब है अनंत चतुर्दशी, क्या है गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी: देशभर में भादप्रद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश महोत्सव की धूमधाम जारी है. गणेश उत्सव का यह पर्व चतुर्थी से 10 दिन तक मनाया जाता है.…

बाबा उमाकान्त जी ने सत्संग में बताया दु:ख तकलीफ पाप से छुटकारा कैसे मिलेगा

धर्म कर्म: रूहानी तालीम, अध्यात्मिक पढ़ाई करवाने वाले, प्रेम से, भाव से प्रार्थना करने पर रीझने वाले, स्थाई मस्ती लाने वाले, तिफरकेबाजी से दूर रहने की शिक्षा देने वाले, सामन्य…

छोटे-छोटे लोग बड़ा काम बना देते हैं: सन्त उमाकान्त जी महाराज

धर्म कर्म: जीते जी उपरी लोकों में जाने की युक्ति बताने वाले, चाहे गरीबी हो या अमीरी, प्रभु को कभी न भूलने की शिक्षा देने वाले, गुरु का मिशन पूरा…

समय के संत-सतगुरु ही दिलाते है मुक्ति मोक्ष : ओम कुमार मिश्रा

बिछिया-उन्नाव: तौरा ग्राम में बाबा जयगुरुदेव धर्म विकाश संस्था उज्जैन के तत्वाधान में बाबा जयगुरुदेव जी महाराज का सत्संग समारोह आयोजित किया गया। उज्जैन से बाबा उमाकांत जी महाराज का…

जीवन में सब जगह धोखा मिल सकता है पर, गुरु के चरणों में नहीं: बाबा उमाकान्त जी

धर्म-कर्म : भाव से प्रार्थना करने पर खुश होकर गलतियों को माफ़ करके अंतर में उजाला करने वाले, परमात्मा के द्वारा भेजे गए, उपरी लोकों के निजी अनुभव का इशारों…

बाबा उमाकांत जी ने कहा: नाम दान लेने से पहले इन चीजों को छोड़ना पड़ता है

धर्म-कर्म : निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव जी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, जीते जी देवी-देवताओं के दर्शन और मुक्ति-मोक्ष दिलाने वाले, अति सरल शब्द नाम योग साधना बताने वाले, अमोलक नाम का दान…

लोगों को समझाओ, प्रकृति व भगवान के खिलाफ काम न करे: उमाकान्त जी महाराज

धर्म कर्म: कृपा सिन्धु नर रूप हरी, यानी नर के रूप में आये हुए हरि, स्वयं सतपुरुष के तदरूप, जिन्हें आज भी बहुत से लोग अभी तक पहचान नहीं पाए…